देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारी अधिकारियों के सेवा सम्बन्धी मामलों का निर्णय करने वाले विशेष न्यायालय (ट्रिब्युनल) की नैनीताल पीठ ने एस.एस.पी. उधमसिंह नगर तथा आई.जी. कुमाऊं नैनीताल के कांस्टेबिल कपिल कुमार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में किये गये आदेशों को निरस्त कर दिया। ट्रिब्युनल चैयरमैन जस्टिस यू.सी.ध्यानी तथा वाइस चैयरमैन राजीव गुप्ता की बेच ने कांस्टेबिल कपिल कुमार की याचिका पर यह निर्णय दिया हैै।
उन्होंने इसे कालबाधित कहते हुये विचार करनेे से इंकार कर दिया। इस पर कांस्टेबिल ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय की शरण ली। उच्च न्यायालय के अपील पर विचार करने आदेेश के बाद आई.जी. कुमाऊं ने अपील को अवैध रूप से 01 मार्च 2021 के आदेश से खारिज कर दिया। इस पर कांस्टेबिल कपिल कुमार द्वारा अपने अधिवक्ता नदीम उद्दीन के माध्यम से उत्तराखंड लोक सेवा अधिकरण की नैनीताल पीठ में दावा याचिका दायर की। याचिका में विभागीय दण्ड के आदेश व अपील आदेश को निरस्त करके तथा उसके आधार पर रूके सेवा लाभों को दिलाने का निवेदन किया गया।
याचिका कर्ता की ओर नदीम उद्दीन ने विभागीय जांच तथा दण्ड आदेश व अपील आदेश अवैध, निराधार तथा प्र्राकृतिक न्याय के उल्लंघन के आधार पर निरस्त होने योेग्य बताया। अधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस यू.सी.ध्यानी तथा उपाध्यक्ष राजीव गुप्ता की पीठ ने श्री नदीम के तर्कों से सहमत होते हुये वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधमसिंह नगर के दण्ड आदेश तथा पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं के अपील आदेश को गलत मानते हुये निरस्त कर दिया। अधिकरण ने विभागीय जांच में कर्मचारी द्वारा बताये गये दस्तावेजो पर विचार न करने तथा विचार न करने का कोई कारण लिखित न करने तथा दण्ड आदेश में कर्मचारी के नोटिस को अवैध, निराधार, गलत तथ्यों पर आधारित होने के कारण निरस्त होने योग्य होने के कथन को स्वीकार है लिखने को आधार माना है। अधिकरण ने मामले को पुनः कार्यवाही हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उधमसिंह नगर को भेज दिया है तथा उन्हें नियमानुसार नये सिरे से आदेश तीन माह के अंदर पारित करने को आदेशित किया है। साथ ही याचिकाकर्ता के निलम्बन काल के वेतन भत्तों के लिये भी उपयुक्त आदेश पारित करने को आदेशित किया है।
