देहरादून, ब्यूरो। जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जाएका) तथा भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने पर्वतीय राजमार्गों के रख रखाव हेतु क्षमता विकास संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस तकनीकी सहयोग परियोजना का मकसद पर्वतीय राजमार्गों के परिचालन तथा रखरखाव कार्यों से जुड़े संगठनों की संस्थागत क्षमता में वृद्धि करना है। इस परियोजना पर अप्रैल 2022 से काम शुरू होने की संभावना है, जिसके लिए प्रशासनिक मंजूरी 24 जनवरी, 2022 को ली जा चुकी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देश में राष्ट्रीय एक्सप्रेस वे तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास तथा रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। भारत माता योजना (चरण 1) के अंतर्गत, मंत्रालय ने पर्वतीय इलाकों जैसे कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पूर्वाेत्तर क्षेत्र आदि में राजमार्गों के विकास पर खास ध्यान दिया है। पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण और उनकी क्षमता संवर्धन इलाके के भीतर तथा सीमा क्षेत्रों के साथ संपर्क बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण कार्य है। पहाड़ी इलाकों में सड़कों के अंतर्गत अनेक संरचनाएं शामिल होती हैं जैसे कि पुल, सुरंगें आदि और सड़क तंत्र के सुगमतापूर्वक काम करने के लिए इन सभी का समुचित रखरखाव करना जरूरी होता है। भारत में, डिजाइनिंग तथा पहाड़ी इलाकों में सुरंगों समेत राजमार्ग के कार्यों की निगरानी से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों की कमी है, और यही कारण है कि यहां क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। इस परियोजना के अंतर्गत, जाएका भारत में एक जापानी विशेषज्ञ की दीर्घकालिक आधार पर तथा जापान से ही लघु अवधि के लिए अन्य विशेषज्ञों की तैनाती करेगा जो जापानी जानकारी एवं अनुभव के आधार पर रखरखाव संबंधी पुस्तिकाओं को तैयार करने में मदद करेंगे। इस परियोजना के तहत, कार्मिकों का प्रशिक्षण भारत तथा जापान दोनों जगहों पर किया जाएगा ताकि पर्वतों एवं वनों से घिरे देश जापान के अनुभवों को उनके साथ साझा किया जा सके। उम्मींद की जा रही है कि इससे सरकारी संगठनों जैसे नेशनल हाइवेज़ एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के कार्मिकों की रखरखाव क्षमताओं में सुधार आएगा। साथ ही, यह नॉर्थ ईस्टर्न प्रोविंस रोड नेटवर्क कनेक्टिविटी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (चरण 1 से 5) समेत ऋण समर्थित परियोजनाओं के रखरखाव और प्रबंधन में भी योगदान करेगा, जो कि भारत के पूर्वाेत्तर क्षेत्रों के विकास हेतु जापान के सहयोग से निर्माणाधीन है।
