हरिद्वार, ब्यूरो। गुरुकुल कांगड़ी (समविश्वविद्यालय) के अन्तर्राष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो0 दिनेश भट्ट की टीम ने पक्षी सर्वेक्षण के दौरान आद्रभूमि का भी संर्वेक्षण किया और पाया कि हरिद्वार के अधिकांश दलदली जमीन व पोखरों पर मानवीय अतिक्रमण हो चुका है, दलदली जमीनों को मलवा डालकर पाट दिया गया है या कूड़ा डालने की जगह बना दी गयी हैं। धार्मिक नगरी में इस अधार्मिक कार्य का सबसे ताजा उदाहरण पॉश कालोनी गोविन्द पुरी से गंगा-नहर से सटा सैकड़ो साल पुराना वैट लैण्ड यानी दलदली जमीन जो हजारों वर्ग फुट में फैली थी, अब सिकुड़ कर कुछ ही वर्ग फुट रह गयी है।
गोविन्द नगर घाट जाने हेतु इसी वैटलैण्ड को पाट कर रास्ता बना दिया गया है, जबकि नियमानुसार पुल बनना चाहिये था, सरकारी विभागों द्वारा ही ‘‘सींवेज पम्पिंग स्टेशन’’ भी इसी वैटलैण्ड पर ही बना दिया गया है। लोगों ने अपने घर का रिपेयरिंग का मलवा व सड़क के ठेकेदार ने सड़क का मलवा भी यही डाल दिया है। कालोनी वालांे ने सड़क चौडी कर कार पार्किग बना दी, बाकि काम अनियमित/अवैद्य बस्तियों ने पूरा कर दिया।
