वन विभाग भले ही कुछ अवैध धार्मिक स्थल तोड़कर अतिक्रमण के खिलाफ बड़े अभियान की बात कर रहा हो, लेकिन हजारों हेक्टेयर वन भूमि पर लीज के नाम पर आज भी अतिक्रमण है। जिसके खिलाफ कार्रवाई तो दूर अब तक विभाग के पास डिटेल तक नहीं है। वहीं पिछले सात माह से अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चल रहा है।
वन विभाग ने प्रदेश भर में लोगों के खेती, आश्रम, रिजॉर्ट सहित कई तरह के कामों के लिए वन भूमि लीज पर दे रखी है। जिनमें से ज्यादातर की लीजें खत्म हो गई हैं, लेकिन जिनके पास ये जमीनें थी वे अब स्थायी तौर इन पर इनको कब्जाए बैठे हैं। जिनमें हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल, मसूरी, धनोल्टी आदि में सबसे ज्यादा लीज के नाम पर जमीनें कब्जाई गई हैं।
जिनमें खेती,डेयरी उद्योग या अन्य तरह के काम धंधे किए जा रहे हैं। इनमें से कई लोग तो जमीनों पर 40-50 साल से बसे होने को दावा कर अपना हक जता रहे हैं। सेटेलाइट इमेज से दिखी सैकड़ों हेक्टेयर जंगल पर खेती वहीं विभाग को यूएसनगर, राजाजी पार्क और हरिद्वार के आसपास कई हेक्टेयर वन भूमि पर जंगल काटकर खेती का पता चला।
जिसकी सेटेलाइट इमेज निकाली गई तो इससे विभाग के होश उड़ गए। इन जगहों पर बड़ी संख्या में गुर्जरों ने बाहरी लोगों को जमीनें बंटाई पर खेती के लिए दी हैं। इन जमीनों पर ट्रैक्टरों व भारी मशीनों से व्यावसायिक खेती होती मिली। जबकि जंगल में इस तरह की खेती की अनुमति नहीं है। वन मुख्यालय के नोटिस के बावजूद अब तक ये खाली नहीं करवाए गए।
वन भूमि पर कई जगह अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई होनी है। अब तक जो भी बड़े अतिक्रमण चिन्हित हैं उनको हटाने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ में दूसरा पक्ष कोर्ट चला गया है, जिस कारण अब कब्जा हटाना मुश्किल है। ऐसे मामलों में भी मजबूत पैरवी के निर्देश दिए हैं। लीज का भी रिकॉर्ड निकाला जा रहा है।
