बाघ की खाल की तस्करी के जिन आरोपियों को वन विभाग की टीम लंबे समय से खोज रही थी, वह अब कोर्ट से स्टे ले आए हैं। बकायदा तराई केंद्रीय वन प्रभाग ने उन पर 10-10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। एसटीएफ इंस्पेक्टर एमपी सिंह ने बताया, वन तस्करी से जुड़ा आरोपी देहरादून निवासी अर्जुन सिंह उर्फ कव्वा और उसके बेटे अनिल गिरफ्तारी से बचने को कोर्ट से स्टे ले आए हैं।
विभाग को कोर्ट का स्टे ऑर्डर मिला है। उन्होंने बताया कि आरोपी अर्जुन देहरादून में कबाड़ी का काम करता है। करीब दस साल पहले राजाजी नेशनल में पैंगोलिन तस्करी में उसे गिरफ्तार किया था। आरोप सिद्ध होने के उसे बाद कोर्ट से सजा भी हुई थी। जेल से छूटने के बाद वह बाघ का शिकार कर खाल की तस्करी करने लगा।
ऊधमसिंह नगर में 2010 व 2013 में तेंदुए की तीन खाल, 2018 में एक बाघ की खाल और हड्डियां, 2023 में बाघ की तीन खाल बरामद की गई थीं। इस वर्ष जुलाई में एसटीएफ ने बाघ की सबसे बड़ी खाल बरामदगी में सभी पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की। इसमें हर बार जांच में अर्जुन उर्फ कव्वा का नाम प्रकाश में आया।
