लघु जल विद्युत परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाने वालों को हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर अब प्रति मेगावाट एक लाख रुपये शुल्क देना होगा। पूर्व में हुए निर्णय में राज्य गठन से पूर्व की परियोजनाओं के लिए यह राशि एक लाख और बाद के प्रोजेक्ट के लिए टेंडर की राशि तय की गई थी। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसमें संशोधन पर मुहर लग गई।
दरअसल, कुछ माह पूर्व राज्य ने हिमाचल प्रदेश की लघु जल विद्युत परियोजनाओं की नीति को हूबहू एडॉप्ट किया था। हिमाचल में लघु जल विद्युत परियोजनाओं के क्षमता विस्तार के प्रस्ताव पर एक लाख रुपये प्रति मेगावाट का शुल्क लिया जाता है लेकिन उत्तराखंड में यह राशि 25 लाख रुपये थी।
संशोधन पर मुहर
इसके बाद में इसमें संशोधन किया गया, जिसके बाद राज्य गठन के पूर्व के प्रोजेक्ट को तो एक लाख रुपये का शुल्क रखा था लेकिन राज्य गठन के बाद टेंडर की राशि को आधार बनाया गया था। इसमें शुक्रवार को संशोधन पर मुहर लगी।अब राज्य गठन के पूर्व या बाद की सभी लघु जल विद्युत परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाने वालों को एक लाख रुपये प्रति मेगावाट शुल्क ही देय होगा। माना जा रहा है कि इस संशोधन से राज्य में लघु जल विद्युत परियोजनाओं की क्षमता विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा। नए निवेशक भी आएंगे।
