मंगलवार शाम जिस मोटर मार्ग पर कार दुर्घटना में चार लोगों की मौत हुई, वह मार्ग संभागीय परिवहन विभाग से पास नहीं था। बावजूद इसके मार्ग पर वाहनों का संचालन हो रहा था। करीब डेढ़ करोड़ की धनराशि फूंकने के 19 साल बाद भी इस सड़क पर साइड कटिंग व डामरीकरण के अभाव में यह सड़क 19 सालों से अधर में लटकी हुई है। सरकारी तंत्र की लापरवाही अब मौत बनकर ग्रामीणों की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। इसका उदाहरण देखना है तो जयहरीखाल प्रखंड के गुमखाल-सारी मोटर मार्ग में चले आए।
वर्ष 2004 में लोक निर्माण विभाग ने इस मोटर मार्ग के निर्माण के नाम पर सारे नियम तोड़ने का रिकॉर्ड बना डाला। मौजूदा परिपेक्ष्य में इस मोटर की चौड़ाई 4.5 से लेकर 5.0 मीटर के बीच है। जबकि, पहाड़ों में सड़क काटने के लिए न्यूनतम 5.90 से लेकर 6.85 होना जरूरी है। इस मोटर मार्ग को बनाने में लोनिवि ने मार्ग के शुरुआत में जो ढाल आ रही है, उसके मोड़ की कटिंग का काम भी मानकों के विपरीत है।
लोनिवि के अधिकारी भले ही अब ढाल गलत बनाने की बात स्वीकारने के साथ ही ग्रेड में सुधार कर इसका प्रस्ताव शासन को भेजने की बात कह रहे हों, लेकिन सच्चाई यह है कि 2004 से अब तक इस सड़क निर्माण के नाम पर निरंतर मनमानी करके बजट को ठिकाने लगाया जाता है।
सड़क निर्माण के लिए दी गई लाखों की धनराशि
यदि सड़क निर्माण कार्य पर नजर डालें तो वर्ष 2004 में राज्य योजना से तीन किलोमीटर पहाड़ कटिंग कर सड़क बनाने के साथ दीवारों व पैराफीट बनाने के लिए 41.70 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई। आठ वर्ष बीतने के बाद 2012-13 में 1.57 किलोमीटर आगे की सड़क बनाने के लिए 9.52 लाख व चार वर्षों के बाद 2016 में एक किलोमीटर मार्ग के लिए 43 लाख रुपये स्वीकृति कर दिए गए। जबकि एक किलोमीटर मार्ग में डामरीकरण के लिए वर्ष 2016-17 में 45 लाख रुपये अलग से खर्च किए गए।
अभी तक कच्चा है 5 किलोमीटर का मार्ग
लोनिवि के दस्तावेजों में पांच किलोमीटर का यह मार्ग अभी तक कच्चा है। जबकि स्वीकृति बजट से एक किलोमीटर का डामर कर दिया गया है, लेकिन मोटर मार्ग में किया गया डामर घटिया गुणवत्ता के चलते बरसात की भेट चढ़ चुका है।
यहां तक कि पांच किलोमीटर तक के कच्चे मोटर मार्ग का अभी तक समतलीकरण तक नहीं हो पाया है। जबकि साइड कटिंग के अभाव में इस मोटर मार्ग में दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना हुआ है।यदि लोनिवि ने संकरे रास्तों का चौड़ीकरण करने के साथ ही पैराफीट बनाने का काम ईमानदारी के साथ किया होता तो मंगलवार की रात जान गंवाने वाले चार ग्रामीणों की जान बचाई जा सकती थी।
